ईश्वर का गणित
- April 19, 2022
एक बार दो आदमी एक मंदिर के पास बैठे गपशप कर रहे थे । वहां अंधेरा छा रहा था और बादल मंडरा रहे थे । थोड़ी देर में वहां एक आदमी आया
एक बार दो आदमी एक मंदिर के पास बैठे गपशप कर रहे थे । वहां अंधेरा छा रहा था और बादल मंडरा रहे थे । थोड़ी देर में वहां एक आदमी आया
दान खंति = शांति, सहनशिलता, क्षमाशिलता मैत्री उपेक्षा = समता
श्रीमद् भागवतगीता एक जीवन-ग्रंथ हैं । यह मानव जीवन का एक अनुपम, उत्कृष्ट एवं आदर्श मार्गदर्शक हैं । इसमें जीवन का सम्पूर्ण दर्शन हैं, जीवन के प्रश्नों के उत्तर हैं, जीवन जगत
What is Navagraha Mantra? As per Hindu mythology, a person’s life is decided by the horoscope, and the basics that help the astrologers to predict it is based on these 9 planets
रामकृष्ण को ऐसा हुआ था। वे काली के ऊपर ध्यान करते थे, धारणा करते थे। फिर धीरे-धीरे उनको ऐसा हुआ कि काली के उनको साक्षात होने लगे अंतस में। आंख बंद करके
एक बार यूनान का एक बादशाह बीमार पड़ा। वह इतना बीमार पड़ा कि डाक्टरों ने और चिकित्सकों ने कहा कि अब वह बच नहीं सकेगा। उसकी बचने की कोई उम्मीद न रही।
न जन्म है, न मृत्यु है।बस, जीवन है।अनादि, अनंत। वह जन्म के पूर्व भी है।अन्यथा, जन्मता कौन? वह मृत्यु के बाद भी है।अन्यथा, मरता कौन? जन्म जीवन का आरंभ नहीं है।मृत्यु जीवन
आगे बढ़ो–भय न करो!परमात्मा साथ है।फिर, निष्पाप तेरा चित्त है।और, ध्यान-विस्फोट का क्षण भी निकट है।भीतर जो कुछ भी हो रहा है वह सब उसी क्षण की पूर्व तैयारी है।बाधाएं जो प्रतीत
तृष्णा एक जहर है। हमारे जीवन-पात्र में भरा हुआ मीठा मादक जहर । मीठा है इसलिए स्वाद के मारे हम इसे निरंतर पीते रहते हैं। मादक है इसलिए इसे पीकर हम मदहोश
Collections of Vipassana Books which I have received from Friends or WhatsApp Groups of Vipassana. So I thought of collecting everything in one place. Written by Guruji S. N. Goenka or others
सत्य को जरूर खोजो।लेकिनसत्य को खोज वही पाता है, जो खोजते-खोजते स्वयं खो जाता है।‘स्व’ का पूर्णतया खो जाना ही सत्य का पूर्णतया आ जाना है।सत्य के आगमन के लिए आंतरिक अवकाश
जिसकी खोज है, वह जरूर ही मिलता है।सरिता सागर को खोज लेती है।प्यास सरोवर को खोज लेती है।प्रार्थना प्रभु को खोज लेती है।प्रभु तो निकट ही है, बस, हम ही प्यासे नहीं
मृत्यु का ध्यान कर।मृत्यु पर ध्यान कर।मृत्यु से बचने में भय है।मृत्यु से पलायन में भय है।मृत्यु के साक्षात्कार में अभय है।
प्रेम। ध्यान के अतिरिक्त और कोई मार्ग नहीं है।या, जो भी मार्ग हैं, वे सब ध्यान (Meditation) के ही रूप हैं।प्रार्थना भी ध्यान है।पूजा भी।उपासना भी।योग भी ध्यान है।सांख्य भी।ज्ञान भी ध्यान
मुक्ति के मार्ग पर चलने वालों को चारित और वारित शीलों में परिपक्व और सुरक्षित होना चाहिए । १) शील पालन से सभी भौतिक, मानवी, दैवी और निर्वाणिक संपत्तियाँ प्राप्त/ उपलब्ध होती